डिजिटल‬ ‎इंडिया‬

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‪डिजिटल‬ ‎इंडिया‬ भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें। इस योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है। डिजिटल इंडिया के तीन कोर घटक हैं-
1- डिजिटल आधारभूत ढाँचे का निर्माण करना,
2- इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाओं को जनता तक पहुंचाना,
3- डिजिटल साक्षरता।
योजना को 2019 तक कार्यान्वयित करने का लक्ष्य है। एक टू-वे प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जाएगा जहाँ दोनों (सेवा प्रदाता और उपभोक्ता) को लाभ होगा। यह एक अंतर-मंत्रालयी पहल होगी जहाँ सभी मंत्रालय तथा विभाग अपनी सेवाएं जनता तक पहुंचाएंगें जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा और न्यायिक सेवा आदि। चयनित रूप से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को अपनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सूचना केंद्र के पुनर्निर्माण की भी योजना है।
यह योजना मोदीजी प्रशासन की टॉप प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक है। यह एक सराहनीय और सभी साझेदारों की पूर्ण समर्थन वाली परियोजना है। जबकि इसमें लीगल फ्रेमवर्क, गोपनीयता का अभाव, डाटा सुरक्षा नियमों की कमी, नागरिक स्वायत्तता हनन, तथा भारतीय ई-सर्विलांस के लिए संसदीय निगरानी की कमी तथा भारतीय साइबर असुरक्षा जैसी कई महत्वपूर्ण कमियाँ भी हैं। डिजिटल इंडिया को कार्यान्वयित करने से पहले इन सभी कमियों को दूर करना होगा।
एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके लिए सरकार ने 1,13,000 करोड़ का बजट रखा है। इस कार्यक्रम के तहत 2.5 लाख पंचायतों समेत छ: लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य है और सरकार की योजना 2017 तक यह लक्ष्य पाने की है। अब तक इस योजना के तहत 55 हजार पंचायतें जोड़ी गई हैं।
इन पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने पर 70 हजार करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव है। इसके साथ ही 1.7 लाख आईटी पेशेवर तैयार करना भी लक्ष्य है। इसके लिए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक स्किल डेवलपमेंट योजना की शुरुआत की है जो कि देश के लोगों को सरकार से सीधे जुड़ने में मददगार हो।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी चाहते हैं कि भारतीय किसानों को आईटी क्षेत्र से लाभ मिलना चाहिए। कृषि उत्पादन, मृदा संबंधी विवरण और बिक्री मूल्य का विश्व की कीमतों के साथ तुलनात्मक अध्ययन, इन तीनों को एकसाथ जोड़ देना चाहिए। अगर हमारे पास बोए गए बीज संबंधी विवरण होगा तो हम उत्पादन का स्वरूप का पता लगा सकते हैं।
-वे मानते हैं कि अब भारत में सरकारी कर्मचारियों के तकनीकी रूप से उन्नयन की आवश्यकता है। हर रिकॉर्ड बढ़ाने के लिए डेटाबेस में हरेक विवरण रखना आवश्यक हो गया है ताकि प्रदर्शन, सुरक्षा, रखरखाव को बेहतर किया जा सके।
-सभी विद्यालयों में सेंट्रल सर्वर होना चाहिए जो सभी प्रकार के ई-प्रशिक्षण सामग्री (शिक्षकों एवं छात्रों, दोनों के लिए) से परिपूर्ण सेंट्रल क्लाउड से जुड़ा होगा। वर्ग 6 से ऊपर के सभी छात्रों को टेबलेट दिया जाना चाहिए।
-लेकिन 3000 रुपए के आस-पास मूल्य के ये टेबलेट अच्छी गुणवत्ता वाले होने चाहिए जो उन्हें आसानी से उनके स्कूल सर्वर से जोड़ सकें। सभी ई-सामग्री क्षेत्रीय भाषा एवं अंग्रेजी भाषा में होनी चाहिए। 100 प्रतिशत की अनुवृत्ति (सब्सिडी) केवल उन लोगों को दी जाए जो इस संबंध में बिलकुल असमर्थ हैं।
-प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए सेवाओं का डिजिटलीकरण पारदर्शिता, जिम्मेदारी और त्वरित बदलाव लाने में अहम है। लोगों को इसकी महत्ता के बारे में बताना एवं इसका व्यापक उपयोग निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुनिश्चित करेगा, जैसे- टीसीएस द्वारा पासपोर्ट प्रक्रिया की शुरूआत की की गई। सरकार को लोगों को शिक्षित करना चाहिए और मोबाइल उपकरणों पर आसानी से इंटरनेट की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। सभी क्षेत्रीय और सहकारी बैंकों को एटीएम सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
-आरएफआईडी अर्थात रेडियो आवृत्ति पहचान बार कोड पहचान के समान ही एक तकनीक है। यह छोटे इलेक्ट्रॉनिक चिप के साथ एकीकृत किया जा सकता है और एकल उपयोगकर्ता की पहचान के लिए व्यक्तिगत फोनों में इस्तेमाल किया जाता है, उसके द्वारा किए गए लेन-देन में, खरीददारी, यात्रा, होटल एवं रेस्तरां के बिल, बिजली, पानी, गैस, बस, ट्रेन, हवाई जहाज, नौकायान इत्यादि से संबंधित बिलों का एक जगह भुगतान हो।
-बेहतर संचार, जानकारी साझा करने और हमारे देश के डिजिटलीकरण के लिए संपूर्ण भारत में मुफ़्त वाईफाई सक्रिय किया जाना चाहिए।
-हरेक गांव में ई-सेवा केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए ताकि लोगों को सभी सरकारी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराई जा सके।
-जब हम इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लाभ उठाई जाने वाली सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों से जोड़ेंगे, स्वाभाविक रूप से लोग इसकी तरफ आकर्षित होंगे। एक निश्चित स्तर पर पहुंचने के बाद कुछ सेवाएं केवल इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में ही उपलब्ध रहेंगी। केरल का ‘अक्षय केन्द्र’ मॉडल सभी स्थानों पर बड़ी संख्या में सेवाएं उपलब्ध कराने में बेहद सफल रहा है। लोग वहां जाकर सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रोसेस्ड (प्रसंस्कृत) की जाती हैं और एक निश्चित समय के भीतर सेवाएं उपलब्ध करा दी जाएगी। कोई रिश्वत नहीं, कोई चिंता नहीं।
-न्यायिक प्रणाली को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाकर उसे पुलिस विभाग, सीबीआई, फॉरेंसिक आदि के साथ जोड़ा जाए ताकि अवांछित एवं जटिल प्रक्रिया से बचा जा सके।
-ई-वोटिंग के माध्यम से छात्रों को मतदान का अधिकार दिया जाए। दूर जाकर पढ़ाई कर रहे छात्र चुनाव के समय दूरी की वजह से मतदान नहीं कर पाते हैं। यहां तक कि बहुत से छात्र इस चुनाव में भी मतदान नहीं कर सके। ई-वोटिंग के लिए एक अलग वेबसाइट शुरू की जानी चाहिए। अगर एक छात्र अपने सही प्रलेखों के साथ ऑनलाइन वोटिंग के लिए अनुरोध करता है तो उसे एक पासवर्ड भेजा जाना चाहिए ताकि वह ई-वोटिंग कर सके।
-सरकार ने पहले ही ‘भारतीय नागरिक पहचान कार्ड’ (आईसीआईसी) परियोजना के रूप में एक सही कदम उठाया है। इस केंद्रीय डेटाबेस में सभी नागरिकों से संबंधित सभी जानकारियां, जैसे – जन्म तिथि प्रमाण-पत्र, शैक्षिक प्रमाण-पत्र, वोटर पहचान-पत्र, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन, पासपोर्ट, गैस, बिजली, टेलीफोन उपभोक्ता आईडी, बैंक खाता संख्या, बॉयोमीट्रिक्स, बीमा, वाहन पंजीकरण इत्यादि होनी चाहिए। सभी नागरिकों को एकल डिजिटल आईसीआईसी या एक नंबर दिया जाना चाहिए। लोगों को यह नंबर याद रखना चाहिए। उस कार्ड या नंबर को सभी तरह की आवश्यकताओं, चाहे बच्चों का स्कूल में दाखिला हो, अस्पताल में भर्ती करने के समय, यातायात चौकियों, बीमा लेने के समय, रेल-हवाई टिकट, रंगीन टीवी खरीदने, के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए।
-सभी सरकारी या निजी निकायों को मोबाइल के एक आसान अनुप्रयोग (एप्लीकेशन) के माध्यम से आईसीआईसी नंबर सत्यापित करने होंगे जिसमें अनुप्रयोग (एप्लीकेशन) में आईसीआईसी नंबर डालते ही नागरिकों के सारे विवरण देखे जा सकते हैं। यह अनुप्रयोग (एप्लीकेशन) अंगूठे के निशान से भी सत्यापण कार्य कर सके। (तकनीक के माध्यम से यह संभव है)। इससे न सिर्फ़ नागरिकों को आसानी होगी बल्कि भ्रष्टाचार कम करने में भी मदद मिलेगी। इन्हीं सभी कामों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रधानमंत्री ने जो महत्वाकांक्षी योजना बनाई है, उसे डिजिटल इंडिया ही है ।
यह डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था (नॉलेज बेस्ड इकॉनमी) बनाने के लिए एक कार्यक्रम है। यह 7 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री की बैठक के दौरान शुरू किया गया और इस कार्यक्रम की शुरुवात 1 जुलाई 2015 को की गयी एवं कार्यक्रम 2018 तक चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित किया जाएगा। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम परिवर्तनकारी प्रकृति का है जो यह सुनिश्चित करेगा की सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से नागरिकों के लिए उपलब्ध हों।
21 वीं सदी में भारत अपने नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रयास करेगा जहां सरकार और उसकी सेवाएं नागरिकों के दरवाजे पर उपलब्ध हों और लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव की दिशा में योगदान करें। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य आई टी की क्षमता को इस्तेमाल कर के भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। मै इसके लिए ‪बीजेपी‬ सरकार एवं हमारे प्रधानमंत्री जी श्री ‪‎नरेन्द्र‬ ‪मोदी‬ जी का आभार व्यक्त करूँगा की उन्होंने ऐसी योजनाये चलाकर भारत को विकास की और अग्रसर किया है ।