डॉ मनोज राजोरिया (सांसद करौली-धौलपुर) ने स्कूल शिक्षा में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य किये जाने की मांग की|

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डा.मनोज राजौरिया (सांसद करौली-धौलपुर) ने लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान शून्यकाल में बोलते हुए स्कूलों में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य किये जाने की मांग रखी। उन्होंने नई शिक्षा नीति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज समाज में कर्तव्य और अधिकारों की बात होती है तो लोगों की कर्तव्य के बजाय अधिकारों के प्रति ज्यादा जागरूकता है। आज शिक्षा ऐसी दी जा रही है, जिससे लोगों ने रचनात्मक भूमिका की बजाय विध्वंसक भूमिका निभाना शुरू कर दिया है। समाज का हर तबका, चाहे आमजन, शिक्षक, छात्र-छात्राऐं, अथवा कर्मचारी हों, हमारे साथी नेता भी हो सकते हैं, लेकिन जब नैतिक शिक्षा की कमी होती है तो वे अपने मार्ग से भटक जाते हैं। यही वजह है कि वे अपने कार्याें को अच्छी दिशा देने के बजाय गलत दिशा में ले जाते हैं और योग्यता का दुरूपयोग करने लगते हैं। सांसद के द्वारा मानव संसाधन मंत्री जी से मांग की कि कक्षा एक से बारह तक नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए जिससे आने वाली पीढियों में नैतिक शिक्षा मजबूत हो और देश सही दिशा  में चल सके|