सांसद डाॅ. मनोज राजोरिया ने लोकसभा में नियम 193 के अन्तर्गत देश के विभिन्न भागों में सूखे की स्थिति के बारे में चर्चा की

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डाॅ. मनोज राजौरिया (सांसद करौली-धौलपुर) ने लोकसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान नियम 193 के अन्तर्गत चर्चा करते हुए कहा कि सूखा नाम लेते ही आंखों के सामने एक भयावह तस्वीर सामने आती है जिसके बारे में देश को गम्भीरता पूर्वक विचार कर इसका समाधान करना चाहिए। इसकी वजह से समस्याओं का एक दौर शुरू होता है जिसकी सबसे अधिक मार किसानों को झेलनी पडती है, क्योंकि सूखा पडते ही किसान की जीवन रेखा उसकी खेती तबाह और बर्बाद हो जाती है और इसी बर्बादी की वजह से देश में हजारों किसानों ने अब तक आत्महत्याऐं की हैं। सूखे की वजह से सभी प्रकार के अनाजों एवं दलहनों का उत्पादन कम अथवा नगण्य हो जाता है और अन्नदाता भूखे मरने को मजबूर हो जाते हैं। साथ ही समाज पर इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी बडे नुकसानदायक होते हैं। सांसद महोदय, डॉ मनोज राजोरिया जी ने कहा “जब पूरे देश में सूखे की स्थिति पर चर्चा हो रही है, मैं आपको बताना चाहूॅंगा कि देश की लगभग 12 प्रतिशत जनता सूखे की मार से पीडित है। मैं राजस्थान के बारे में ध्यान दिलाना चाहूॅंगा कि राजस्थान में 11 जिले सूखे से अति पीडित हैं एवं अन्य जिले सूखे से पीडित हैं। राजस्थान में भूमि जल स्तर 250 से 400 फीट गहरा हो चुका है। दुर्भाग्य से बादलों की कृपा भी राजस्थान पर कम होती है। जिसकी वजह से एक वर्ष में राजस्थान में औसत वर्षा सिर्फ 164 मिमी होती है। राजस्थान का 57 प्रतिशत हिस्सा सूखे पीडित जोन में आता है। मैं सदन का ध्यान राजस्थान की यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी की ओर दिलाना चाहता हूॅं जिन्होंने इस समस्या से किसानों एवं आम जन को राहत पहुंचाने के लिए देश के पहले राज्य के रूप में नदियों को जोडने की योजना बनाई है। मैं आशा करता हूँ कि माननीया मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की दृष्टि एवं कठिन परिश्रम से ये कार्य पूर्ण हो सकता है। क्योंकि राजस्थान सरकार यह कार्य आर्थिक संसाधनों की कमी की वजह से कठिनाई महसूस कर सकती है। अतः मेरा सदन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री जी से आग्रह है कि राजस्थान में नदियों को जोडने के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणां एवं सहयोग करेंगे।”